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विक्रम संवत्सर: 2076

वसंत की बहार ये मौसम का प्यार और फिर हवाओं का इजहार। चंदन की खुशबू में इतराते फूलों के साथ आया है चैत्र का यह त्यौहार। हिन्दी और हिन्दुस्तान की संस्कृति का यह पहला दिन विक्रम सवंत 2076 का शुभ आरंभ है। यह हरियाली की खुबसूरती है जो चहेरे पर मुस्कान बन उभरी है। लंबी सर्दीयों के बाद राहत के आंचल में जिन्दगीं पसरने को तैयार है।
मौसम प्यार बरसाता है, चहरे पर खुशियाँ झलकती है। लम्बी ठंड के बाद राहत आती है साथ ही खेत-खलियानों की बनावट लाती है। चंपा-चमेली हो या गुलाब, अपने सगे -संबधियोे के साथ पूरी टोली में मेहमान नवाजी कराती है। नजरें घुमाने पर इतने आनंदित भारतवंशी को देखकर, कभी न खुलने वाले किवाड़ भी खुलते है। सामने से उछलकर घूघंट की आढ में मुस्कान भी खिलखिला देती है। तभी तो भारत, भारती और भारतीयता की अमिट पहचान बनाती है। माँ भवानी का शुभ आगमन होता है। शक्ति की संक्लपना के साथ भारतीय नव वर्ष की शुरूआत होती है। भारतीय परंपरा के अनुसार सूरज की किरण से नए दिन की शुरूआत मानी जाती है। 21 मार्च को पृथ्वी, सूर्य का एक चक्कर पूरा कर लेती है और उस समय दिन और रात बराबर होते हैं। चैत्र मास में रातें छोटी और दिन बड़ी होने लगती हैं। यह महिना दो ऋतुओं का मेल है। भारतीय समाज में ऋतुएँ बहुत महत्व रखती है। नववर्ष का आगमन न सिर्फ नई तारीख लाता है अपितु परिवर्तन की नई आश लाता है।

आप सभी को नव वर्ष की शुभकामनएँ

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