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जन्मदिन मुबारक बादशाहे गजल: जगजीत सिंह

आवाज के जादूगर गजलों के शहंशा शेरो शायरी से महफिल की जान,जगजीत सिंह आज के दिन ही 1941 में जन्मे थे। प्यार निभाने से लेकर दिल टुटने तक का सफर जगजीत की आवाज के साथ काफी रोचक हो जाता है। घर-घर में गुनगुनाये जाने वाले जगजीत, राजस्थान के गंगानगर में जन्में थे। जिनके बचपन का नाम जगजीवन था। इन्होने कुरूक्षेत्र यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन किया। फिल्म जिंगल से शुरूआत की और फिर कई अल्बम में गाने भी गाए। 2003 में जगजीत पद्म भूषण से नवाजे गए।

ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो

भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी
मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन
वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी

जैसे बेहतरिन बचपन की यादें देने वाले जगजीत ने 10 अक्टूबर 2011 को आखिरी सांस ली। इश्क को ताजगी देने वाले जगजीत आज भी अपनी गजलों में याद किये जाते है।

आराध्या

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