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विश्व कैंसर दिवस : उदीयमान चेतना

4 फरवरी को पूरी दुनिया विश्व कैंसर दिवस के रूप में जानती है। कैंसर अपने आप में एक घातक और जानलेवा बीमारी है, जो कि वर्तमान परिदृश्य में किसी महामारी से कम नहीं है।
आज यानी 4 फरवरी को पूरी दुनिया को इस से जागरूक एवं सजग रहने का संदेश दिया जाता है। कैंसर सिर्फ एक नाम नहीं है, इसके कई रूप हैं, विविध आयाम हैं और विभिन्न प्रभाव क्षेत्र हैं अगर इसके रूपों की बात करें तो प्रमुखत: निम्नवत हैं।
आम फेफड़ों का कैंसर, ऐसोफागस, पेट, मुंह, लैरिंक्स, लिम्फोमा, सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर हैं।
प्रभाव क्षेत्र की बात करें तो कैंसर में शरीर के किसी भी हिस्से की कोशिकाएं काफी तेजी से बढ़ने लगती हैं. इनसे आस-पास मौजूद टीश्यूज, अन्य कोशिकाएं और ऑर्गन डैमेज होने लगते हैं।
आयाम की बात करें तो ताजा आंकड़ों के मुताबिक 2018 में पूरी दुनिया में करीब एक करोड़ लोगों की मौत हुई थी। साथ ही आयाम में बात करें तो कैंसर एक बार में नहीं होता है यह चरणबद्ध तरीके से होता है जिस के प्रमुख चार चरण है
कैंसर की पहली और दूसरी स्टेज में इसका ट्यूमर छोटा होता है। ये आस-पास के टिश्यूज की गहराई में नहीं फैलता है। यही वजह है कि इन स्टेज में ही कैंसर का पता लगने पर इसका इलाज संभव है।

तीसरे स्टेज में कैंसर बॉडी में विकसित हो चुका होता है। ट्यूमर बड़ा हो चुका होता है और इसके अन्य अंगों में फैलने की संभावना बढ़ जाती है।वहीं, चौथी अवस्था कैंसर की आखिरी अवस्था होती है। इसमें कैंसर अपने शुरुआती हिस्से से अन्य अंगों में फैल जाता है। इसे मैटास्टेटिक कैंसर कहा जाता है।
आयाम, प्रभाव क्षेत्र व रूपों को देखकर आपको अंदाजा लग गया होगा की यह सहज और सरल नहीं है, इससे बचना मुमकिन तो है लेकिन नामुमकिन से कम नहीं।
अगर डॉक्टरों की सलाह मानी तो कुछ बातें ऐसी हैं जिनका पालन कर धरातल स्तर पर हम कैंसर की चपेट में आने से बच सकते हैं।
१) विटामिन और पोषणयुक्‍त आहार
२) नियमित व्‍यायाम
३) सही तरह से खाना
४) धूम्रपान से दूरी
५) चीनी और नमक का कम सेवन करें
कैंसर एक महामारी है विज्ञान भी कभी कभी इस से हार जाता है, लेकिन जो नहीं हारता वह है हमारा आत्मबल, हमें आत्मिक रूप से इतना सबल होना चाहिए कि बीमारी से लड़ने की प्रबल इच्छा हमारी इच्छाशक्ति का हिस्सा हो और बीमारी से पहले एक बात जो हमें याद रखना चाहिए वो ये कि इतनी जागरूकता कम से कम रहे कि हम और हमारा शरीर किन किन बीमारियों की चपेट में है समय-समय पर हमें इसकी की जानकारी प्राप्त होती रहे।
विज्ञान का अपना काम है और हमारे ज्ञान का अपना काम, दोनों अगर समान रूप से और इमानदारी से अपना काम करें तो वह दिन दूर नहीं जब कैंसर भी कोई बीमारी नहीं बस इतिहास का कोई शब्द रहकर रह जाएगा।

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