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होमो जहांगीर भाभा : एक क्रांतिकारी वैज्ञानिक

रमन जिन्हें भारत का लियोनार्डो डी विंची कहा करते थे, ऐसे होमी जहाँगीर भाभा भारत के प्रमुख वैज्ञानिक थे, जिन्होंने भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की कल्पना की थी। जब होमी जहाँगीर भाभा 29 वर्ष के थे और उपलब्धियों से भरे 13 वर्ष इंग्लैंड में बिता चुके थे। उस समय ‘कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय’ भौतिक शास्त्र के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ स्थान माना जाता था। वहाँ पर वे केवल पढ़ाई ही नहीं बल्कि कार्य भी करने लगे थे। जब अनुसंधान के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियों भरे वर्ष थे तभी स्वदेश लौटने का अवसर उन्हें मिला।
उन्होंने अपने देश भारत में रहकर ही कार्य करने का निर्णय उन्होंने लिया। उनके मन में अपने देश में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक क्रांति लाने का जुनून था। यह डॉ. भाभा के प्रयासों का ही प्रतिफल है कि आज विश्व के सभी विकसित देशों में भारत के नाभिकीय वैज्ञानिकों की प्रतिभा एवं क्षमता का लोहा माना जाता है।
अक्सर डबल ब्रेस्ट सूट पहनने वाले भाभा की वैज्ञानिक विषयों के साथ-साथ संगीत, नृत्य, पुस्तकों और चित्रकला में बराबर की रुचि थी. वैज्ञानिकों को भाषण देते हुए तो आपने देखा होगा लेकिन अपने साथियों का पोर्ट्रेट या स्केच बनाते हुए शायद नहीं, लेकिन खुश मिजाज जहांगीर भाभा के दिल में परमाणु के नाभिकीय की कार्यक्रमों के अलावा प्रकृति की असीम सुंदरता को भी निहारने और कलम से कागज पर उतारने का शौक बहुत शानदार था।
30 अक्टूबर, 1909 को जन्मे होमो जहांगीर भाभा इस दुनिया को 24 जनवरी, 1966 को अलविदा कह कर चले गए ऐसे क्रांतिकारी वैज्ञानिक को शत-शत नमन….

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