featured Society Spiritual

रमण महर्षि – अनमोल गुरू अद्वितीय संत

रमण महर्षि का जन्म 30 दिसम्बर, सन 1879 में मदुरई, तमिलनाडु के पास ‘तिरुचुली’ नामक गाँव में हुआ था।
रमण महर्षि ने आत्म विचार पर बहुत बल दिया वह सदैव कहते थे बाहर कुछ नहीं है जो कुछ भी है तुम्हारे अंदर है बस आवश्यकता है उसे देखो इतनी बारीकी से जैसे कोई नहीं देख सकता उसी का नतीजा था कि उनके शिष्य और प्रसिद्ध गणितज्ञ वेंकटरमण बचपन में बेहद साधारण थे किंतु महर्षि ने अपने परिश्रम व साधना बल से उन्हें विश्व की सर्वश्रेष्ठतम गणितज्ञों में स्थान दिलवाया आइए जानते हैं ऐसे श्रेष्ठ गुरु के जीवन की एक श्रेष्ठ कहानी।

महर्षि रमण से कुछ भक्तों ने पूछा, ‘क्या हमें भगवान के दर्शन हो सकते हैं?’ ‘हां, क्यों नहीं हो सकते? परंतु भगवान को देखने के लिए उन्हें पहचानने वाली आंखें चाहिए होती हैं,’ महर्षि रमण ने भक्तों को बताया। ‘एक सप्ताह तक चलने वाले समारोह के अंतिम दिन भगवान आएंगे, उन्हें पहचानकर, उनके दर्शन कर तुम सब स्वयं को धन्य कर सकते हो,’ महर्षि ने कहा।
भगवान के स्वयं आने की बात सुनकर भक्तों ने मंदिर को सजाया, अत्यंत सुदंर ढंग से भगवान का श्रृंगार किया तथा संकीर्तन शुरू कर दिया। महर्षि रमण भी समय-समय पर संकीर्तन में जाकर बैठ जाते। सातवें दिन भंडारा करने का कार्यक्रम था। भगवान के भोग के लिए तरह-तरह के व्यंजन बनाए गए थे। भगवान को भोग लगाने के बाद उन व्यंजनों का प्रसाद स्वरूप वितरण शुरू हुआ।
मंदिर के ही सामने एक पेड़ था जिसके नीचे मैले कपड़े पहने एक कोढ़ी खड़ा हुआ था। वह एकटक देख रहा था और इस आशा में था कि शायद उसे भी कोई प्रसाद देने आए। एक व्यक्ति दया करके साग-पूरी से भरा एक दोना उसके लिए ले जाने लगा तो एक ब्राह्मण ने उसे लताड़ते हुए कहा, ‘यह प्रसाद भक्तजनों के लिए हैं, किसी कंगाल कोढ़ी के लिए नहीं बनाया गया।’ ब्राह्मण की लताड़ सुनकर वह साग-पूरी से भरा दोना वापस ले गया। महर्षि रमण मंदिर के प्रांगण में बैठे यह दृश्य देख रहे थे।

भंडारा संम्पन्न होने पर भक्तों ने महर्षि से पूछा, ‘आज सातवां दिन है, किंतु भगवान तो नहीं आए।’ ‘मंदिर के बाहर जो कोढ़ी खड़ा था, वे ही तो भगवान थे। तुम्हारे चर्म चक्षुओं ने उन्हें कहां पहचाना? भंडारे के प्रसाद को बांटते समय भी तुम्हें इंसानों में अंतर नजर आता है,’ महर्षि ने कहा। इतना सुनना था कि भगवान के दर्शनों के इच्छुक लोगों का मुंह उतर गया।

Advertisements

0 comments on “रमण महर्षि – अनमोल गुरू अद्वितीय संत

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: